06 जून 2024

गम नही

ऐसा दिखा दो शख्स कोई, आँख जिसकी नम नही 
पर जिंदगी की बाग में उम्मीद के गुल कम नही 

इक दिन भरेंगे सब जखम.. फीके पडेंगे दर्द, गम 
बस सब्र रख लो.. वक्त से बढिया कोई मरहम नही 

कल था ढला वो दौर भी.. ये भी ढलेगा दौर कल 
सुइयाँ घडी की भी घडी भर इक जगह कायम नही 

ऐसे लडो तकदीर से, खुद को ही खुद पे नाज हो 
गर जी गए, कर लो जशन.. मिट भी गए तो गम नही 

- कल्पेश पाटील 
(२५/०१/२०१८ - ०६/०६/२०२४)

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