बस चार पल नज़दीक आके दूर जाया ना करो
फिर ओढके चिलमन हया का, मुस्कुराके दूर से
बेनूर दुनिया में मेरी गुलशन सजाया ना करो || मुखडा ||
होले से बैठे मनचली तितली गुलाबी फूल पर
तुम मखमली मुस्कान से वैसा ही करती हो असर
नटखट निगाहों की छुअन से तार दिल की छेडके
तनहाइयों में प्रीत की सरगम बजाया ना करो
बस चार पल नज़दीक आके दूर जाया ना करो || अंतरा-१ ||
आके अचानक रूबरू धडकन बढाती हो कभी
करके नज़रअंदाज़ फिर नैना लडाती हो कभी
दस बार मुडके देख फिर अंजान बनती हो कभी
सब कुछ समझती हो, मगर नादान बनती हो कभी
पलखें झुकाना हो गया.. नज़रें चुराना हो गया
बेजार दिल को करने का नुस्खा पुराना हो गया
आगे बढाओ हाथ अब.. लाओ जुबाँ पर बात अब
शतरंज की चालों में अब यूँ वक्त ज़ाया ना करो
बस चार पल नज़दीक आके दूर जाया ना करो || अंतरा-२ ||
- कल्पेश पाटील
(१९-२४/०४/२०२४, ०९-११/०६/२०२४)
(१९-२४/०४/२०२४, ०९-११/०६/२०२४)