01 अक्टूबर 2023

खिला है आसमाँ में चाँद

बडी लंबी अमावस थी 
मगर रब ने सुनी फ़रियाद 
खिला है मुद्दतों के बाद फिरसे आसमाँ में चाँद 
खिला है आज फिरसे चाँद                   || मुखडा || 

फिजाओं में, निगाहों में 
सदी भर के अंधेरे थे 
नजारें चाँद बिन सूने 
भले लाखों सितारें थे 
अंधेरी कैद से आखिर हुई इक रोशनी आजाद 
खिला है आसमाँ में चाँद                  || अंतरा-१ || 

गुज़ारिश चॉंद से अब है 
करे जल्दी न जाने‌ की 
करू दीदार जी भरके 
रहे हसरत‌ न कुछ बाकी 
यूॅं बरसा चॉंदनी की बारिशें, रख लू उमरभर याद 
खिला है आसमाँ में चाँद                  || अंतरा-२ || 

यहा लाखों है दीवाने 
तुम्हारे रूप में ही दंग 
मगर मुझको लुभाता है 
तुम्हारी सादगी का रंग 
लिखू मैं नज़्म तुम पे और सुनाऊ, तुम कहो "इरशाद" 
खिला है आसमाँ में चाँद                  || अंतरा-३ || 

- कल्पेश पाटील 
(२२,३०/०९/२०२३, ०१/१०/२०२३) 

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