25 नवंबर 2023

सुनी मीठी गज़ल मैंने

सुनी मीठी गज़ल मैंने तेरे खामोश अधरों में 
पढी दिल की खबर मैंने तेरी मदहोश नजरों में 
|| मुखडा || 

मुझे बस देखकर तेरा गुलाबों सा महक जाना 
नजर को जब नजर छू ले, हया से नैन झुक जाना 
मचलना धडकनों का दिल में, जैसे नाव लहरों में 
|| अंतरा-१ || 

संदेसें खास भेजेंगे निगाहों के झरोखों से 
जरूरत हो न लब्जों की, करेंगी गुफ्तगू साँसें 
चलेंगे हम हकीकत के परे, ख्वाबों के शहरों में 
|| अंतरा-२ || 

- कल्पेश पाटील 
(२३/०९/२०२३ - २५/११/२०२३) 

01 अक्टूबर 2023

खिला है आसमाँ में चाँद

बडी लंबी अमावस थी 
मगर रब ने सुनी फ़रियाद 
खिला है मुद्दतों के बाद फिरसे आसमाँ में चाँद 
खिला है आज फिरसे चाँद                   || मुखडा || 

फिजाओं में, निगाहों में 
सदी भर के अंधेरे थे 
नजारें चाँद बिन सूने 
भले लाखों सितारें थे 
अंधेरी कैद से आखिर हुई इक रोशनी आजाद 
खिला है आसमाँ में चाँद                  || अंतरा-१ || 

गुज़ारिश चॉंद से अब है 
करे जल्दी न जाने‌ की 
करू दीदार जी भरके 
रहे हसरत‌ न कुछ बाकी 
यूॅं बरसा चॉंदनी की बारिशें, रख लू उमरभर याद 
खिला है आसमाँ में चाँद                  || अंतरा-२ || 

यहा लाखों है दीवाने 
तुम्हारे रूप में ही दंग 
मगर मुझको लुभाता है 
तुम्हारी सादगी का रंग 
लिखू मैं नज़्म तुम पे और सुनाऊ, तुम कहो "इरशाद" 
खिला है आसमाँ में चाँद                  || अंतरा-३ || 

- कल्पेश पाटील 
(२२,३०/०९/२०२३, ०१/१०/२०२३) 

06 अप्रैल 2023

याद आते हो

कभी आसू, कभी मुस्कान बनकर याद आते हो 
कभी सपना, कभी अरमान बनकर याद आते हो 

कभी शबनम की बूँदों सी, कभी रिमझिम फुहारों सी 
कभी जज़बात का तूफान बनकर याद आते हो 

भले दो-चार पल ही तुम रुके दहलीज पे दिल के 
मगर अब उम्र के मेहमान बनकर याद आते हो 

हमारे दर्मियाँ क्या राबता था ? था भरम, या सच ? 
कभी अपना, कभी अंजान बनकर याद आते हो 

किताबें जिंदगी की एक पन्ने पे ही अटकी है 
अधूरी अनकही दास्तान बनकर याद आते हो 

कभी रूठी हुई मुस्कान बनकर याद आते हो 
कभी बिछडा हुआ अरमान बनकर याद आते हो 

- अनामिक 
(०१-०६/०४/२०२३)