सुनी मीठी गज़ल मैंने तेरे खामोश अधरों में
पढी दिल की खबर मैंने तेरी मदहोश नजरों में
|| मुखडा ||
मुझे बस देखकर तेरा गुलाबों सा महक जाना
नजर को जब नजर छू ले, हया से नैन झुक जाना
मचलना धडकनों का दिल में, जैसे नाव लहरों में
|| अंतरा-१ ||
संदेसें खास भेजेंगे निगाहों के झरोखों से
जरूरत हो न लब्जों की, करेंगी गुफ्तगू साँसें
चलेंगे हम हकीकत के परे, ख्वाबों के शहरों में
|| अंतरा-२ ||
- कल्पेश पाटील
(२३/०९/२०२३ - २५/११/२०२३)