07 मई 2024

आते रहेंगे रूबरू

नादान है किस्मत बडी.. करती खुराफातें कई 
कितनी दफा हम दोनों को ये ला रही है रूबरू 

संजोग है ? या है इशारा आसमानी मेल का ? 
चाहे न चाहे हम, मगर दास्तान होनी है शुरू          || मुखडा || 

​नटखट समय की साजिशों में बात है कुछ अनकही 
वरना हमारे रासतें बेवक्त टकराते नही 

मक्सद बिना, मतलब बिना इक फूल भी खिलता नही 
यूँ ही नही नजरें हमारी आते-जाते मिल रही 

होगा करिश्मा.. सोचकर कब तक करेंगे इंतजार ? 
यूँ कायनाती सिलसिलें चलते नही हैं बार बार​ 

अब तो पहल करनी पडेगी.. तुम करो, या मैं करू ? 
चाहे न चाहे हम, मगर आते रहेंगे रूबरू                || अंतरा || 

- कल्पेश पाटील 
(२९/०४/२०२४ - ०७/०५/२०२४)